Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
तस्मान्मा त्वं भवो बालो राम राजीवलोचन ।
अविनाशमिहालोक्य नित्यमाश्रय सुस्थिरम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे कमलनयन
श्रीरामचन्द्रजी, आप मूर्ख मत बनिये। विचार करके अविनाशी नित्य ओर सुस्थिर पदार्थ का अवलम्बन
कीजिये