Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
असदिदमखिलं मया समेतं त्विति विगणय्य विषादितास्तु मा ते ।
सदिह हि सकलं मया समेतं त्विति च विलोक्य विषादितास्तु मा ते ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
आदि विषाद की प्राप्ति न हो