Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
मनसा कल्पितं सर्वं देहादिभुवनत्रयम् ।
संस्मृतौ कारणं चैतच्चक्षुरालोकने यथा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
सब देहादि तीनों भुवन मन से ही कल्पत हैं। जैसे देखने में चक्षु कारण है वैसे ही इनके स्मरण में
मन कारण है