Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
संसाराम्बुनिधावस्मिन्वासनाम्बुपरिप्लुते ।
ये प्रज्ञा नावमारूढास्ते तीर्णा वुडिताः परे ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनारूपी
जल से व्याप्त इस संसाररूपी समुद्र में जो लोग प्रज्ञारूपी नाव में चढ़े, वे पार हुए और जो प्रज्ञारूपी नाव
में नहीं चढ़े, वे डूब गये