Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
क्षुरधाराप्रमितया धिया परमधीरया ।
प्रविचार्यात्मनस्तत्त्वं ततः स्वपदमाविश ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह प्रज्ञारूपी नाव कैसी है, ऐसा यदि कोई कहे, तो उसे वशति हैं।
विवेक, वैराग्य आदि से तीक्ष्ण की गई अतएव छुरे की धारा के तुल्य, सुख, दुःख आदि द्रनद्रो को
सहने में परमधीर बुद्धि से आत्मतत्त्व का विचार कर उसके बाद आप अपने स्वरूप में प्रवेश कीजिये