Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
यथा तत्त्वविदः प्राज्ञा ज्ञानबृंहितचेतसः ।
विहरन्ति तथा राम विहर्तव्यं न मूढवत् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, ज्ञान से उदार चित्तवाले तत्त्वज्ञानी प्राज्ञ पुरुष जिस प्रकार बर्ताव करते हैं वैसे ही
आपको व्यवहार करना चाहिये, न कि मूढो की नाई