Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
प्रभावस्याभिमानस्य गुणानां यशसः श्रियः ।
न क्वचित्कृपणा लोके महान्तस्तत्त्वदर्शिनः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे, ज्ञानवार्नो की भी कहीं पर फललिप्सा हो सकती है, तो इस पर नहीं, ऐसा कहते हैं ।
विद्या, तप और पराक्रम आदि के उत्कर्षरूप प्रभाव के, अभिमान के, निपुणता, कुल, शील आदि
गुणों के, यश और सम्पत्ति के विषय में लोक में लोभ प्रसिद्ध है, तत्त्वदर्शी महात्मा पुरुष तो प्रभाव आदि
के मिथ्या होने से कहीं पर भी लोभ नहीं करते