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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

रम्ये धनेऽथ दारादौ हर्षस्यावसरो हि कः । वृद्धायां मृगतृष्णायां किमानन्दो जलार्थिनाम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

रमणीय धन ओर स्त्री, पुत्र आदि समृद्धि होने पर हर्ष का अवसर ही क्या है ? मृगतृष्णा के वृद्धि को प्राप्त होने पर क्या जल चाहनेवाले पुरुषों को आनन्द होता है ?