Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
धनदारेषु वृद्धेषु दुःखं युक्तं न तुष्टयः ।
वृद्धायां मोहमायायां कः समाश्वासवानिह ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
धन और स्त्री -पुत्र आदि के बढ़ने पर
दुःखी होना ही उचित है ओर सन्तुष्ट होना उचित नहीं है । मोह-माया के बढ़ने पर इस संसार में कोन
स्वस्थ रह सकता है ? धन, स्त्री, पुत्र आदि की वृद्धि होने पर संसाररूप रोगकी वृद्धि की संभावना से
दुःख करना ही उचित हे; हर्ष करना ठीक नहीं, यह अर्थ है