Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यैरेव जायते रागो मूर्खस्याधिकतागतैः ।
तैरेव भोगैः प्राज्ञस्य विराग उपजायते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
वृद्धि को प्राप्त जिन भोगों से मूर्ख को
राग होता है, वृद्धि को प्राप्त उन्हीं भोगों से विद्वान पुरुष को वैराग्य होता है