Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कस्यांचिद्भूरभूत्सृष्टौ नीरन्ध्रतरुसंकटा ।
कस्यांचिन्नरनीरन्ध्रा कस्यांचिद्भूधरावृता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी सृष्टि में पृथ्वी निबिड़ पेड़ों से व्याप्त हुई, किसी सृष्टि
में मनुष्यों से निबिड़ हुई और किसी सृष्टि में पर्वतों से व्याप्त थी