Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
भूरभून्मृन्मयी काचित्काचिदासीद्दृषन्मयी ।
आसीद्धेममयी काचित्काचित्ताम्रमयी तथा ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई भूमि मृणमयी हुई, तो
कोई पत्थरों से पूर्ण थी । कोई स्वर्णमयी थी, तो कोई ताम्रमयी थी