Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
इहैव कानि चित्राणि जगन्त्यन्यान्यथान्यथा ।
अन्यान्येकैकलोकानि निर्महांस्यपि कानिचित् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस ब्रह्माण्ड में ही कितने
आश्चर्यमय जगत हैं और अन्यान्य ब्रह्माण्डमें भी अन्य प्रकारों से आश्चर्यमय जगत हैं किन्हीं जगतों में
केवलमात्र सूर्य आदि के तुल्य प्रकाश है, तो कोई प्रकाश रहित भी हैं