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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

अनन्तानि जगन्त्यस्मिन्ब्रह्मतत्त्वमहाम्बरे । अम्भोधिवीचिजलवन्निमज्जन्त्युद्भवन्ति च ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस ब्रह्मतत्त्व महाकाश में अनन्त जगत सागर की तरंगों के समान उत्पन्न होते हैं और लीन होते हैं