Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
उन्मज्जन्त्यो निमज्जन्त्यो न सत्या नाप्यसच्छ्रियः ।
जडारम्भा वितन्वन्त्यस्ता एव खलता इव ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
मूर्खो
से अध्यस्त और विस्तार को प्राप्त की जा रही आकाश लताओं की तरह आविर्भूत ओर तिरोभूत होती
हुई ये त्रिभुवनशोभाएँ न तो सत्य हैं और न असत्य ही हैं