Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तरङ्गसमधर्मिण्यो दृष्टनष्टशरीरकाः ।
सर्वासां सृष्टिराशीनां चित्राकारविचेष्टिताः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
सभी अपने अन्तर्गत सृष्टि समष्टिरूप
ब्रह्माण्डों की सृष्टियाँ तरंग के समान नश्वरतारूप धर्मवाली, देखते ही नष्ट होनेवाली और विचित्र
आकारवाली प्राणियों की चेष्टाओं से युक्त हैं