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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verses 3–4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verses 3–4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

जात्या राजससात्त्विक्याः कथनावसरान्तरे । उत्पत्तिर्भवता प्रोक्ता शास्त्रैः कमलजन्मनः ॥ ३ ॥ श्रीवसिष्ठ उवाच । बहूनि ब्रह्मलक्षाणि शंकरेन्द्रशतानि च । नारायणसहस्राणि समतीतानि राघव ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार प्रशंसा द्वारा गुरुजी को प्रोत्साहित कर प्रसंगप्राप्त ब्रह्मा आदि देवताओं के ऐश्वर्य को जानने की इच्छा करनेवाले श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं : राजस, सात्विक जीवजातियों के उपदेश के समय आपने विविध प्रकार की सृष्टियों का प्रतिपादन करनेवाले श्रुति, पुराण आदि के वचनरूपी प्रमाणो से ब्रह्मा की जो उत्पत्ति प्रस्तुत की थी, उसका आप स्पष्टरूप से वर्णन कीजिये