Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अन्येषु च विचित्रेषु ब्रह्माण्डेषु च भूरिशः ।
नानाचारविहाराणि विहरन्ति सहस्रशः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, अनेक लाख ब्रह्मा, अनेकों
सौ शंकर ओर इन्द्र एवं अनेकों हजार नारायण बीत चुके हैं ।।४॥ अन्य विचित्र प्रकार के ब्रह्माण्डो में एवं
इस ब्रह्माण्ड मेँ भी विधि आचार, विहार के हजारों देवता, असुर आदि के शरीर विचरण करते हैं