Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
कदाचित्पुरुषस्यास्य नाभौ पद्मं प्रजायते ।
तस्मिन्संवधते ब्रह्मा पद्मजोऽसौ प्रकीर्तितः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
कभी नारायण नामक पुरुष की नाभि में कमल उत्पन्न होता है, उसमें ब्रह्मा वृद्धि को प्राप्त होता
है, कमल में जन्म होने के कारण वह पद्मज कहा जाता हे