Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
किमिवास्यां वद ज्ञप्तौ कथं संभवतीह ते ।
क्वचिद्बालमनोराज्यमिदं पर्यनुयुज्यते ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि सत् पुरुष का अपने नाभिकमल में जन्म नहीं हो सकता
है, तो इस असंग अद्वितीय ब्रह्म में आपका यह जगद्रूप द्वैत कैसे हुआ, इसे आप बताइये, सद्रूप से
विद्यमान सत् का जन्म कैसे हो सकता है, आपका यह प्रश्न बालक के मनोराज्य प्रश्न के समान ही है,
भाव यह कि क्या कहीं बालक का मनोराज्य भी प्रश्न का विषय हो सकता हे ?