Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
न चैवेदं कदाचित्तु साधो जगदनीदृशम् ।
सर्वशक्तौ हि संसारशक्तिता विद्यते यतः ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सज्जनशिरोमणे
श्रीरामचन्द्रजी, यह जगत कभी भी असत् नहीं है, क्योकि सर्वशक्ति चैतन्य में जगद्बीज मर्यादा
विद्यमान हे