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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 60

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

न कदाचन संसारः किलायं राम सत्सदा । सर्वशक्तावसंसारशक्तिता विद्यते यतः ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, यह संसार कभी भी सत्‌ नहीं है, क्योकि सर्वशक्ति चैतन्य में असंसार स्वभावता, (असंगाद्वितीयस्वभावता) सदा परमार्थतः विद्यमान है