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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

चितः सर्वाः समायान्ति संतताः सृष्टिदृष्टयः । तत्स्था एवाप्यतत्स्थाभाश्चन्द्रादिव मरीचयः ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे चन्द्रमा से ही ये सब किरणे आती हैं, उसमें स्थित होती हुई भी उसमें अस्थित-सी प्रतीत होती हैँ । ऐसे ये सब चारों ओर विस्तृत सृष्टियाँ चैतन्य से ही प्राप्त होती हैं और उसमें स्थित होती हुई भी अस्थित- सी प्रतीत होती हैं