Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
ज्ञदृष्ट्या सर्वमेवेदं ब्रह्मैवेति महामते ।
नास्ति संसार इत्येतदुपपद्यत एव च ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि संसार की सत्ता ओर असत्ता परस्पर विरुद्ध है 2 तो इस पर दृष्टिभेद होने
से कोई विरोध नहीं है, ऐसा कहते है ।
हे महामते श्रीरामचन्द्रजी, ज्ञानी की दृष्टि से यह सब कुछ ब्रह्म ही है, इसलिए यह संसार नहीं है,
यह उपपन्न ही है