Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तेषामब्जोद्भवादीनां ब्रह्माण्डेषु दिवौकसाम् ।
उत्पत्तयो महाबाहो विचित्राभ्युत्थिता इव ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो, ब्रह्मा आदि उन देवताओं की ब्रह्माण्ड में
उत्पत्तिर्यो इन्द्रजाल में उदित हुई-सी हैं