Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
सुमेरुकर्णिकाकान्ता सह्यकेसरशालिनी ।
पूर्णा स्फीतोदरोदेति रोदसी नलिनी पुनः ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
सुमेरुरूप
कर्णिका से मनोहर, सहयाद्रिरूपी केसर से सुशोभित, प्राणियों के पुण्यरूपी सुगन््ध से और भोगरूप मकरन्द
से भरी हुई अन्तरिक्ष और पृथिवीरूपी कमलिनी फिर उत्पन्न होती है