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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verses 74–75

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verses 74–75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 74

संस्कृत श्लोक

व्योमकाननमाक्रम्य वल्गत्यंशुनखोत्करैः । तमःकरिघटा भेत्तुं पुनर्भास्करकेसरी ॥ ७४ ॥ पुनरिन्दुश्चलत्स्वच्छमञ्जरीसुन्दरैः करैः । करोत्यमृतमाह्लादि दिग्वधूमुखमण्डनम् ॥ ७५ ॥

हिन्दी अर्थ

सूर्यरूपी सिंह व्योमरूपी वन में आक्रमण कर किरणरूपी नखों से अन्धकाररूपी गजघटाओं को छिन्न-भिन्न करने के लिए फिर उदित होता है