Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । क्रियाविशेषबहुला भोगैश्वर्यहताशयाः । नापेक्षन्ते यदा सत्यं न पश्यन्ति शठास्तदा ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि यह संसार वक्र एकमात्र मन की कल्पना ही है, परमार्थतः यह ब्रह्म ही है; तो बुद्धि, प्रतिभा, निपुणता आदि से सम्पन्न महापुरुषो में कोई भी वैसा क्यो नहीं देखता, इसमें क्या कारण है ? ऐसी यदि कोई शंका करे, तो परमार्थ तत्व की ओर ध्यान न देना ओर उसके विरुद्ध भोग-ऐश्वर्य आदि की आसक्ति ही इसमें कारण है, ऐसा कहते है। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, भोग और ऐश्वर्य से हतबुद्धि अतएव ऐहिक ओर पारलौकिक भोग, एश्वर्य के उपायभूत लौकिक ओर वैदिक विविध कर्मो से बढ़ी हुई अभिलाषावाले एवं स्वयं अपनी आत्मा ओर दूसरों की वंचना करनेवाले पुरुष जब सत्य तत्त्व की ओर ध्यान नहीं देते, तब वे उसे नहीं देखते

सर्ग सन्दर्भ

सैंतालीसवाँ सर्ग समाप्त अड़तालीसवाँ सर्ग भोग आदि की लालसा की निन्दा, दाशूर की उत्पत्ति और प्रसन्न हुए अग्निदेव से उनको वर प्राप्ति |