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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

एक एव वने तस्मिन्दाशूरः प्ररुरोद ह । दशापनीतपितृकः करुणं कुररो यथा ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

दुर्भाग्य द्वारा दाशूर के पिता दाशूर से पृथक्‌ किये गये थे, अतएव एकाकी (>) वे कुरर पक्षी के सदुश करुण विलाप करने लगे