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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

अथासौ शरलोमात्र भुक्त्वा युगगणं ययौ । त्यक्तदेहः सुरागारं मुक्तनीडः खगो यथा ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त वे शरलोमा ऋषि यहाँ पर अनेक वर्षो का उपभोग करके जैसे पक्षी घोंसला छोड कर चला जाता है वैसे ही देह का त्याग कर स्वर्ग को चले गये