Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
उत्थायावश्यकं कृत्वा पाश्चात्यं पितुरादरात् ।
चकार तपसे बुद्धिं दृढामुत्तमसिद्धये ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उठ कर अपने पिता का
ओर्ध्वदेहिक कर्म बड़ी आतुरता के साथ करके उत्तम सिद्धि प्राप्त करने के लिए उन्होने तपस्या के
लिए दृढ निश्चय किया