Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
अथ संकल्पयामास स्वसंकल्पनयैव सः ।
वृक्षाग्रमेव संशुद्धं स्थितिस्तत्रोचिता मम ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर अपनी कल्पना से ही उन्होने
विचार किया कि वृक्ष की चोटी ही पवित्र है, उसी पर मेरा रहना ठीक है