Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
तदिदानीं तपस्तप्स्ये तपसा येन शाखिषु ।
खगवत्स्थितिमाप्नोमि शाखासु च दलेषु च ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए अब मैं
तपस्या करूँगा, जिस तपस्या से वृक्षों, शाखाओं ओर पत्तों पर पक्षियों की तरह रह सकूँ