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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

इति संचिन्त्य संज्वाल्य हुताशमतिभास्वरम् । जुहाव तस्मिन्प्रोत्कृत्त्य मांसं स्वस्कन्धभित्तितः ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा विचार कर खूब धधकती हुई आग जलाकर उसमें अपने कन्धों से नोच नोच कर मांस की आहुति देने लगे