Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
आधिव्याधिपरीताय प्रातर्वाद्य विनाशिने ।
प्रयतन्ते शरीराय हितमज्ञास्तु नात्मने ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
किन्तु अज्ञानी पुरुष आधि-व्याधि से धिरे हुए,
प्रातःकाल या आज नष्ट होनेवाले शरीर के हित के लिए प्रयत्न करते हैं, आत्मा के हित के लिए प्रयत्न
नहीं करते