Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
त्वमप्यज्ञवदज्ञस्य शरीरस्य समीहितम् ।
मा संपादय दुःखाय भवात्मैकपरायणः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप भी अज्ञानियों की तरह जड़ शरीर के हित का दुःख के लिए
सम्पादन न कीजिये, एकमात्र आत्मनिष्ठ होइये