Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
जगन्मायास्वरूपस्य वर्णनाव्यपदेशतः ।
दाशूराख्यायिका राम वर्ण्यमानां मया शृणु ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, जगत
की माया के स्वरूप के उदाहरण रूप से मेरे द्वारा कही जा रही दाशूर की आख्यायिका को आप
सुनिये