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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

दधानं कलिकाजालं स्थगितं पुष्पधूलिभिः । कच्छेष्वर्ककरच्छन्नताराजालमिवाम्बरम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

पल्लवो में फूलों के परागों से आच्छादित कलियों के समूहों को धारण कर रहा वह सूर्य की किरणों से आच्छन्न तारागणों से युक्त आकाश के समान प्रतीत हो रहा था