Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
विलोलविहगैः स्कन्धैः कुलायकुलसंकुलैः ।
वलितं भूतलं लोके पूर्णैर्जनपदैरिव ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
चंचल पक्षियों से पूर्ण हजारों घोंसलों से व्याप्त
स्कन्धो से परिवेष्टित वह लोगों से भरे हुए देशों से वेष्टित भूतल के समान था