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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

कूजद्भृङ्गतरङ्गौघैः पुष्पकेसरराजिभिः । राजमानं पतन्तीभिः सरिद्भिरिव पर्वतम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

गुन- गुना रहे भँवररूपी तरंगसमूहों से युक्त गिर रहीं पुष्पों की केसर राशियों से वह ऐसे विराजमान था, जैसे कि शब्द कर रही तरंगों से ओर फूलों की केसर परम्पराओं से युक्त गिर रही नदियों से पर्वत सुशोभित होता है