Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
भ्रमद्भिः पुष्पपत्रौघैर्मन्दवातविलासिभिः ।
वर्धमानैर्वृतस्कन्धं शुभ्राभ्रैरिव भूधरम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
मन्द-मन्द वायु से विलसित होनेवाले घूम रहे पत्र-पुष्पों के समूहों से, जो
कि दिन-प्रतिदिन बढते थे उसका स्कन्ध-प्रदेश इस प्रकार आच्छादित था जैसे सफेद मेघो से पर्वत
आच्छादित होता हे