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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

स्तबकाङ्गुलिजालेन लोलेनाभिनयक्रियाम् । दिशन्तमिव वल्लीनां प्रवृत्तानां वनानिलैः ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

चंचल फूलों के गुच्छरूपी अंगुलियों से वह वन वायु से नाच रही लताओं को नृत्यक्रिया का मानों उपदेश दे रहा था