Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 5, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 5, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मनसिजेषु पराहतमाशयं स परिबोध्य मनस्तदनूशना ।
विगलितेतरवृत्तितयात्मना स च वधूमय एव वभूव ह ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
शुक्राचार्यजी अप्सरा को देखने के पश्चात
कामदेव के बाणो से घायल हुए मनको यथाशक्ति विवेक द्वारा समझा-बुझाकर यानी प्रेयसी के अनुसरण
आदि शारीरिक व्यापारो को रोककर, एकाग्रता को प्राप्त करके भी एकमात्र अप्सरा में एकाग्रचित्त होने
के कारण वे अप्सरा के रूप से अप्सरामय हो गये