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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अथ तां मनसा ध्यायंस्तत्रैवामीलितेक्षणः । आरब्धवान्मनोराज्यमिदमेकः किलोशना ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, वहाँ पर नेत्र बन्द करके मन से उसी अप्सरा का ध्यान कर रहे अकेले श्री शुक्राचार्य ने आगे कहे जानेवाले इस मनोराज्यका आरम्भ किया

सर्ग सन्दर्भ

पाँचवाँ सर्ग समाप्त छठा सर्ग॑ शुक्राचार्य का मन से स्वर्ग मेँ गमन वहाँ पर इन्द्र का उन्हें सम्मान के साथ अपने समीप में बैठाना ।