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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

एषा हि ललना व्योम्नि सहस्रनयनालये । संप्राप्तोऽयमहं स्वर्गमालोलसुरसुन्दरम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

यह आकाशमें मेरे आगे आगे जा रही अप्सरा इन्द्रलोक जाती है इसका अनुगमन कर रहा यह मैं स्वर्ग में, जो कि इधर-उधर घूमनेसे कुछ चंचल हुए देवताओं से बड़ा मनोहर है, आ पहुँचा हू