Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 50, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 50, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तत्रासौ व्योमलग्नायाः शाखायाः प्रान्तपल्लवे ।
विवेश विगताशङ्कमेकाग्रं तप आस्थितः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
एकाग्र तप में स्थित वे वहाँ पर
आकाश से सटी हुई शाखा की चोटी के पल्लव पर निःशंक होकर बैठे