Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

त्वयि सर्वार्थसार्थस्य बृहत्कल्पतरौ स्थिते । अनाथेव कथं नाथ किल शोचाम्यपुत्रिका ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

सब पुरुषार्थो के विशाल कल्पतरूरूप आपके रहते हे नाथ, पुत्ररहित मैं अनाथ की नाई क्‍यों शोक करूँ ?