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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

देहि मे भगवन्पुत्र नो चेद्देहमिहाग्नये । प्रकरोम्याहुतिं पुत्र दुःखदाहोपशान्तये ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भगवन्‌, मुझे पुत्र दीजिये, नहीं तो मैं पुत्र के दुःखदाह की शान्ति के लिए देह को अग्नि के लिए आहुति कर देती हूँ