Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
कदर्थः प्राप्य विज्ञानं ततश्चित्राभिरुक्तिभिः ।
चिरकालमसौ तत्र मुनिः पुत्रमबोधयत् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
शुश्रूषा की व्रतचर्या आदि क्लेशो से पीडित होकर उपायभूत शास्त्रजन्य परोक्ष ज्ञान को प्राप्त कर चुके
उन मुनि ने विविध प्रकार की उक्तियों से चिरकाल तक अपरोक्षज्ञान के लिए पुत्र को उपदेश दिया