Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verses 32–33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verses 32–33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 32,33
संस्कृत श्लोक
आख्यायिकाख्यानशतैर्दृष्टान्तैर्दृष्टिकल्पितैः ।
तथेतिहासवृत्तान्तैर्वेदवेदान्तनिश्चयैः ॥ ३२ ॥
अनुद्वेगितया नित्यं विस्तरेण कथाक्रमैः ।
अनुभूतिमुपारूढै रूढिमेति यथा मयि ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
सेकडो आख्यायिका ओर आख्यानं से, सम्यकूदर्शन द्वारा स्वयंकल्पित दृष्टान्तो से महाभारत आदि
इतिहासो के वृत्तान्तो से और वेद, वेदान्तं के निश्चयो से प्रत्यगात्मा में दृढ़ व्युत्पत्ति को जिस प्रकार
पुत्र प्राप्त होता था, वैसे ही अनुभव से प्रसिद्ध कथा क्रमों से अनायास विस्तारपूर्वक पुत्र को नित्य
उपदेश देते थे